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Tuesday, 21 August 2012

दोस्तों के बीच सकलदीप सिंह


अपने दोस्तों के साथ सकलदीप सिंह की यह यादगार तस्वीर। अवसरः कोलकाता के महाजाति सदन के एनेक्सी हाल में कीर्तिनारायण मिश्र के कविता संग्रह 'विराट वट वृक्ष के प्रतिवाद में' का लोकार्पण समारोह।
बाएं से पहली पंक्ति में कीर्तिनारायण मिश्र, मार्कण्डेय सिंह, (स्व.)गोपाल प्रसाद, विमल वर्मा, (स्व.)सकलदीप सिंह, (स्व.)राजदेव सिंह कौशल। दूसरी पंक्ति में बाएं से मुरारी लाल शर्मा प्रशांत एवं अवधनारायण सिंह। कार्यक्रम का आयोजन नाद प्रकाशन ने किया था, जिसने इस पुस्तक का प्रकाशन किया है। यह प्रकाशन अभिज्ञात का था। और कार्यक्रम का संयोजन भी उन्हीं का था।

सकलदीप सिंह को राहुल सांकृत्यायन सम्मान

कोलकाता के जनसंसार सभागार में कवि-आलोचक सकलदीप सिंह को राहुल सांकृत्यायन सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान प्रदान किया जनकवि नागार्जुन ने। समारोह में डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र, गीतेश शर्मा, सुकीर्ति गुप्ता, आशीष सान्याल, रेवती रमन शाह, शंकर माहेश्वरी आदि उपस्थित थे। यह सम्मान लघु पत्रिका समय संदर्भ की ओर से उसके सम्पादक रवीन्द्र कुमार सिंह द्वारा प्रदान किया जाता है। सम्मान व कार्यक्रम के संयोजक अभिज्ञात थे। अब जबकि न तो सकलदीप सिंह रहे और ना ही बाबा नागार्जुन, यह तस्वीरें एक इतिहास हैं। यह तस्वीरें लगभग 20 वर्ष पूर्व की हैं।






गीतेश शर्मा, नागार्जुन, सकलदीप सिंह एवं डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र












आशीष सान्याल, नागार्जुन, सकलदीप सिंह, डॉ.सुकीर्ति गुप्ता, रेवती रमण शाह, शंकर माहेश्वरी











डॉ.कृष्ण बिहारी मिश्र, गीतेश शर्मा, आशीष सान्याल, नागार्जुन, सकलदीप सिंह, अभिज्ञात

Tuesday, 13 July 2010

ईश्वर को सिरजते हुए



सकलदीप सिंह की आखिरी प्रकाशित पुस्तक "ईश्वर को सिरजते हुए"। इस काव्य संग्रह को नाद प्रकाशन, कोलकाता ने प्रकाशित किया था.

Thursday, 8 July 2010

सकलदीप सिंह नहीं रहे


कोलकाता: कोलकाता में लम्बे अरसे तक रहे और उसे ही कर्मक्षेत्र बनाने वाले श्मशानी पीढ़ी के चर्चित कवि व आलोचक सकलदीप सिंह का 21 मई 2010 को निधन हो गया। बिहार के जलालपुर (सारण) प्रखंड के विशुनपुरा ग्राम में सन् 1930 में जन्मे सिंह ने काव्य एवं आलोचना के क्षेत्र में साहित्य जगत को अविस्मरणीय सौगात दी है। श्मशानी पीढ़ी के संस्थापक सिंह पांचवें दशक में 'व्यक्तिक्रम' काव्य संग्रह से चर्चा में आये। 'पत्थर और लकीरें', 'आकस्मिक', 'क्षेपक', 'प्रतिशब्द', 'निसंग' और 'ईश्वर को सिरजते हुए' आदि इनके महत्वपूर्ण काव्य संग्रह है। उन्होंने तत्कालीन कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया जिसमें 'नया संदर्भ' भी शामिल है।
यह जानकारी उनके पैतृक गांव के कथाकार जवाहर सिंह और पत्रकार तीर्थराज शर्मा ने फोन पर दी है। जानकारी के मुताबिक वे अपने पुत्र सुजीत सिंह के साथ दुर्गापुर में रह रहे थे। जहां से अस्वस्थता के कारण उन्हें कोलकाता ले जाया गया था जहां, उनका निधन हो गया। हालांकि सुजीत सिंह से सम्पर्क फिलहाल नहीं हो सका है। सकलदीप सिंह राहुल सांकृत्यायन सम्मान सहित कुछ सम्मान भी प्राप्त हुए थे।
यह ब्लाग सकलदीप सिंह को ही समर्पित है। आप भी यदि सकलदीप सिंह के बारे में कुछ कहना लिखना चाहते हैं आपका स्वागत है। आप अपने विचार मुझे भेजें। उन्हें स्थान दिया जायेगा।
नोटः यह तस्वीर जगदीश चतुर्वेदी द्वारा सम्पादित 'निषेध' से ली गयी है जिसमें कोलकाता से सकलदीप सिंह को उन्होंने शामिल किया था।